ब्रेकिंग
सेंधवा कॉलेज में छात्रा पर जानलेवा हमला चाकू मारकर किया घायल सेंधवा: कॉलेज में छात्रा पर चाकू से जानलेवा हमला । घटना से फैली सनसनी इंदौर: बीच शहर में बड़ी कार्रवाई: कान्ह नदी किनारे 50 से अधिक अवैध दुकानों पर चला बुलडोजर । सेंधवा में पत्रकार एकता की नई मिसाल, जमीनी समस्याओं के समाधान के लिए बढ़ाया बदलाव की ओर कदम Video: जम्मू कश्मीर के रिटायर्ड डीजीपी केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट से नाराज सेंधवा: नगर पालिका का सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त शहर जन-जागरूकता अभियान । इंदौर: चॉकलेट फैक्ट्री में निर्धारित सीमा से अधिक 375 क्विंटल शक्कर का मिला स्टॉक, जप्त सेंधवा: मनोकामनेश्वर महादेव मंदिर पर विशाल भंडारा, 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने ग्रहण की भोजन प्रस... बड़वानी: कार्य में लापरवाही पर पाटी,ठीकरी ,निवाली बीएमओ को कारण बताओ नोटिस एवं दो बीएमओ के वेतन राजस... देवास : सरकारी जमीन, रास्तों और नालों पर कब्जा करने वालों की अब खैर नहीं
मध्यप्रदेश

दुबई से अवैध कारोबार चलाने वाले सतीश सनपाल को झटका: MP हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने से किया इनकार, चलेगा ट्रायल

जबलपुर (मध्य प्रदेश): विदेश (दुबई) में बैठकर भारत में अवैध सट्टेबाजी और वित्तीय गड़बड़ियों के नेटवर्क का संचालन करने के आरोपी सतीश सनपाल को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है।

हाईकोर्ट जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने जबलपुर के 4 विभिन्न थानों में दर्ज प्राथमिकी (FIR) को निरस्त करने से साफ इनकार करते हुए सतीश सनपाल और उसके सहयोगियों की सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत के इस सख्त रुख के बाद अब आरोपी को निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) में नियमित सुनवाई का सामना करना पड़ेगा।

💻 ‘डिजिटल युग के अपराधों में मौके पर मौजूदगी अनिवार्य नहीं’, हाईकोर्ट की एकलपीठ का कड़ा रुख

न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने अपने आदेश में तकनीक से जुड़े आधुनिक अपराधों की गंभीरता को रेखांकित किया।

अदालत ने स्पष्ट कहा कि, “वर्तमान डिजिटल युग के अपराधों में आरोपी की अपराध स्थल पर शारीरिक रूप से मौजूदगी होना अनिवार्य शर्त नहीं है। पुलिस छापेमारी के समय मौके पर शारीरिक अनुपस्थिति उसकी आपराधिक जिम्मेदारी से मुक्ति का आधार नहीं बन सकती।” हाईकोर्ट ने कहा कि यह एक ऐसा गंभीर विषय है जिसकी प्रामाणिकता की जांच ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर की जानी चाहिए।

🏛️ सतीश सनपाल व सह-आरोपियों ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती, दुबई में रहने का दिया था तर्क

उल्लेखनीय है कि दुबई में रह रहे सतीश सनपाल की ओर से जबलपुर के थानों में दर्ज आपराधिक मामलों को निरस्त कराने हेतु याचिकाएं दाखिल की गई थीं।

इसके साथ ही 4 अन्य सह-आरोपियों ने भी अपने खिलाफ दर्ज केस खत्म करने की गुहार लगाई थी। याचिकाओं में तर्क दिया गया था कि पुलिस ने केवल गिरफ्तार सह-आरोपियों के बयानों (धारा 161) के आधार पर उसे फर्जी शेल कंपनियों और सट्टेबाजी का मास्टरमाइंड बनाया है। याचिकाकर्ता का कहना था कि वह वर्ष 2020 से दुबई में रह रहा है और घटना के समय भारत में मौजूद नहीं था।

🔬 फोरेंसिक रिपोर्ट और मोबाइल चैट्स में साक्ष्य न मिलने की दी थी दलील, शेल कंपनियों के आरोपों को नकारा

सनपाल की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि फोरेंसिक जांच, बैंक खातों व इलेक्ट्रॉनिक चैट्स में सतीश सनपाल का कोई मोबाइल नंबर या प्रत्यक्ष वित्तीय ट्रांजेक्शन नहीं मिला है।

साथ ही दावा किया गया कि जिन कंपनियों को जांच एजेंसियां शेल (फर्जी) बता रही हैं, वे विधिवत पंजीकृत हैं और नियमित टैक्स रिटर्न भरती हैं। हालांकि, शासकीय अधिवक्ता ने याचिकाओं का कड़ा विरोध करते हुए अदालत को बताया कि जांच के दौरान आरोपी की सक्रिय संलिप्तता दर्शाने वाले पर्याप्त साक्ष्य एकत्र किए गए हैं और न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) भी प्रस्तुत किया जा चुका है।

⚖️ ‘सबूतों के आधार पर ट्रायल कोर्ट करे निर्णय’, हाईकोर्ट ने खारिज कीं निरस्तीकरण याचिकाएं

दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के उपरांत जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने माना कि अभियोजन की चार्जशीट में एकत्र साक्ष्य सट्टेबाजी और अवैध लेनदेन के तारों को याचिकाकर्ता से जोड़ते हैं।

अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपी का यह तर्क कि वह मार्च 2020 के बाद भारत नहीं आया, उसे अग्रिम कानूनी राहत का हकदार नहीं बनाता। अपराधों की प्रकृति ऐसी है कि साक्ष्यों की सत्यता का परीक्षण परीक्षण अदालत (Trial Court) द्वारा ही किया जाना उचित होगा।

Show More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button